🚨 *दो पॉलिटिकल पार्टियों के ठिकानों पर आयकर विभाग की रेड – 500 करोड़ का बोगस चंदा, कमिशन काटकर लौटाया गया पैसा!*
बड़ी खबर: राजनीति और काले धन का कनेक्शन बेनकाब
आयकर विभाग ने हाल ही में दो राष्ट्रीय स्तर की
राजनीतिक पार्टियों के कार्यालयों और उनसे जुड़े ट्रस्ट व फर्जी कंपनियों पर ताबड़तोड़
छापेमारी की है। जांच में सामने आया है कि इन पार्टियों ने लगभग ₹500 करोड़ रुपये का
फर्जी राजनीतिक चंदा लिया और उसे 20% तक कमीशन काटकर असली डोनर को वापस कर दिया।
कैसे हुआ घोटाला?
- कंपनियों से लिया गया चंदा दिखाया गया चुनाव
आयोग में
- असल में पैसा उन्हीं कंपनियों को वापस कर दिया
गया
- 20-30% कमीशन काटकर राजनीतिक दलों ने करोड़ों
कमा लिए
- जांच में 25+ शेल कंपनियों का नेटवर्क पकड़ा
गया
- इन कंपनियों के डायरेक्टर या तो नाम के हैं
या फर्जी पते पर
- फंड ट्रांसफर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किया गया
ताकि लीगल दिखे
आयकर विभाग का बयान
“हमें ऐसे सबूत मिले हैं जिससे स्पष्ट होता है
कि कुछ राजनीतिक दल बोगस डोनेशन को मनी लॉन्ड्रिंग के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
आगे की जांच जारी है।” — आयकर विभाग प्रवक्ता
कैसे पकड़ में आया?
- डोनेशन डिटेल्स और बैंकों के ट्रांजैक्शन को
मिलाकर जांच
- जिन कंपनियों ने भारी चंदा दिया था, उनके पास
उतनी इनकम नहीं थी
- कुछ कंपनियां जीएसटी में इनएक्टिव पाई गईं
कौन-कौन घेरे में?
- दो क्षेत्रीय पार्टियों के बड़े नेता
- फर्जी कंपनियों के बिचौलिए
- चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और ट्रस्ट के कर्ता-धर्ता
बोगस चंदा – एक नजर में
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बिंदु |
विवरण |
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कुल बोगस चंदा |
₹500 करोड़ से अधिक |
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कमीशन रेट |
20% से 30% |
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फर्जी कंपनियां |
25+ |
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जांच एजेंसी |
आयकर विभाग, ED |
क्या होगा आगे?
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) जांच में शामिल
- मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज हो सकता है
- चुनाव आयोग भी कार्रवाई कर सकता है
- ट्रस्ट और कंपनियों के पंजीकरण रद्द हो सकते
हैं
निष्कर्ष
राजनीति में पारदर्शिता की बात करने वाले दल खुद
ही काले धन के जाल में फंसे हैं। इस मामले ने एक बार फिर से दिखा दिया कि राजनीतिक
चंदे के नाम पर बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार हो रहा है। अब देखना है
कि कानून अपना काम करता है या राजनीति के दवाब में दब जाता है।


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